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कौन हो तुम, कौन हूं मैं

कौन हो तुम, कौन हूं मैं
एक चेहरा ही तो है
एक दिल भी है शायद
टूटा हुआ सा, बिखरा हुआ सा
हमेशा से ऐसा नहीं था मगर
तुम्हारे अपने किस्से थे
मेरी अपनी कहानियां थी
दिल के हिस्से अपनी अपनी निशानियां थी
मौजे थी, लहरें थी
समुंदर के किनारे भी थे
रेत पर पांवाे के निशा बनाते
तुम भी थे मैं भी था
फिर कुछ लहरें तेज अाई
लौटते हुए के गई अपने साथ
उन पांवो के निशानों को
अब किनारों पर तन्हा खड़े
तुम भी थे, मैं भी था
फिर तुम राह अपनी चल दिए
मैं डगर अपनी ढूंढने लगा
अपनी अपनी कहानियां दिलो में लिए
जब अचानक टकरा गए
बीच राह में एक दिन
तो दिल को एहसास हुआ
तुम भी वही हो मैं भी वही
चेहरा भले अलग अलग है
पर दिलों की दास्तां, वो किस्से कहानियां
दिलों में बसी अपनी अपनी निशानियां
सब वही तो है
नाम अलग है पर एहसास वही है
फिर भी दोनों पूछ बैठे यूहीं
कौन हो तुम, कौन हूं मैं
एक आवाज़ अाई
एक चेहरा ही है बस
अपनी बीती हुई कहानियों का
और आने वाली ऊंचाइयों का
पर कल जब कोई पूछ बैठेगा
कौन हो तुम, कौन हूं मैं
तो ये जवाब मिलेगा
एक चेहरा भी है, एक नाम भी है
अपनी दुनिया से अलग एक पहचान भी है

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