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तू इश्क़ नहीं मेरा मगर प्यार है तुझसे

तू इश्क़ नहीं मेरा, मगर मुझे प्यार है तुझसे
तू चांद नहीं मेरा, मगर मेरी रौशनी है तुझसे
तू आसमां भी नहीं मेरा, मगर मेरी हर छाव है तुझसे
बेसब्री लिए खोजती है तुझे निगाहें
मगर सब्र है कि तेरी परछाई से हाल पूछ लेते है
माना मयस्सर तू नहीं है मेरे हिस्से
मगर तेरी बातों कि एक किताब सी बुन लेते है
सागर से मिलने का एक शौक़ है मुझे
मगर मैं वो दरिया नहीं जो लहरों में समा सके
माना तेरे बज़्म-ए-हयात में एक लम्हा भर ही हूं
मगर उन लम्हों में ही कुछ सदियों सा जी लेता हूं
तुझसे मुझसे कुछ यादें जुड़ी है
घड़ियों को शाद करती कुछ बातें जुड़ी है
कहे अनकहे कुछ अल्फ़ाज़ बिखरे से है
मगर वो कलम वो कागज़ नहीं जिनमें समेट सके इनको
साज है आवाज़ है, मगर परवाज़ नहीं
तू आइना है मेरा, मगर मेरा वजूद नहीं तुझसे
तू आदत नहीं मेरी, मगर मेरी ज़रूरत है तुझसे
तू इश्क़ नहीं मेरा, मगर मुझे प्यार है तुझसे।

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