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अगर तुम गलत ना समझो

अगर तुम गलत ना समझो
तो एक बात कहूंगा
तुम्हारे सहर को अपनी सुबह
और सजर को अपनी शाम करूंगा
दिल तो बचा नहीं खैर अब
पर एक टुकड़ा तुम्हारे नाम करूंगा
डरों नहीं तुमसे प्यार नहीं करूंगा
बस तुम्हारे नाम को अपने नाम से
एक अलग पहचान दूंगा
हाथ नहीं थामुंगा तुम्हारा
पर कदम दर कदम साथ चलूंगा
तुम ठोकर खाओगे तो मैं भी गिरूंगा
गिरना गलत नहीं है
पर फिर उठकर मंजिल तुम्हारे नाम करूंगा
अगर तुम गलत ना समझो
तो एक बात कहूंगा
अपनी खुशियों में से चंद तुम्हारे नाम करूंगा
तुम्हारे गमों को अपने गम सा पहचान दूंगा
तुम्हारी बेपरवाह मुस्कुराहट
जिसे तुमने अपनी आंखों में छुपा दिया है
उन्हें आजाद कर ये हसी अपने नाम करूंगा
बेफिक्र रहो तुमसे इश्क़ नहीं करूंगा
इकरार भी नहीं करूंगा, इज़हार भी नहीं करूंगा
बस अपनी कलम से
चंद आयाते तुम्हारे नाम लिखूंगा
दरीचों के किनारे बैठ
वक़्त बेवक्त तुमसे बात करूंगा
कुछ अपनी कहूंगा कुछ तुम्हारी सुनूंगा
बैठे रहेंगे एक दूसरे का दामन थामे
पर तुम तुम ही रहोगे मैं भी मै ही रहूंगा
इस पाक से रिश्ते को कोई नाम नहीं दूंगा
अगर तुम गलत ना समझो
तो फिर वही बात कहूंगा
सहर से सजर करूंगा
दिल में रखूंगा तुम्हें मगर प्यार नहीं करूंगा

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