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अगर कोई पूछे

अगर कोई तुमसे पूछे कौन हूं मैं
कहना एक झोंका हवा का है
रुख बदलने इन फिज़ाओं का
जो दूर गुलिस्तां से आया है।
अगर पूछे कोई तुमसे क्या हूं मैं
कहना एक सिमटा लिबास है,
जो ख़ामोशी की चादर में लिपटा
अपने हिस्से की कहानियां बुन रहा है।
अगर तुमसे कोई पूछे किस्से मेरे
कहना अपने ही हालातों से
टूटता बिखरता संवर के बनता
हारा हुआ एक इंसान है।
अगर कोई पूछ बैठे नाम मेरा
कहना उसका नाम नहीं
वजूद उसका उसकी कलम
और आयतें उसकी पहचान है।
अगर पूछे कोई क्या कर सकता हूं मैं
कहना वो हर रूप इख्तियार
हर काम मयस्सर कर सकता है
खुशियां मुंतजर होती जिससे है।
कभी कोई अगर पूछे कौन हो तुम
कहना इस हयात-ए-सफर का
एक हमसफ़र भर हूं
राब्ता इतना ही है उससे
की वो मेरे दिल को छूता है,
मैं उसके कलमों में लिखी जाती हूं
वो मेरी राहें बुनता है
मैं उसे लड़खड़ाने से बचाती हूं
शिकस्ता वो भी है, हस्सास मैं भी हूं
चलना वो मुझे सिखाता है
मैं जीना उसे सिखाती हूं।


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