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मेरी चाहत और कुछ पहलू

"पहला पहलू"

मेरी चाहत के हिसाब से अगर बात होती
तो ये कायनात, सारी कायनात मेरे साथ होती।
मेरे दिल के हिसाब से अगर बात होती
तो ये जुनून, सारा जुनून मेरे साथ होता
जो मेरी आंखो के हिसाब से अगर बात होती
तो ये नूर, आंखो का हर नूर मेरे साथ होता
मेरे हाथों के हिसाब से अगर बात होती
तो ये साथ और हाथों में मेरा हाथ होता
मेरे कदमों के हिसाब से अगर बात होती
तो हर मंजिल, दुनिया की हर मंजिल साथ होती
जो मेरे इश्क़ के हिसाब से अगर बात होती
तो ये जिंदगी, सारी जिंदगी बस तेरे नाम होती

"दूसरा पहलू"
मगर ऐसा हो ना सका
अब ये आलम है कि
कायनात नहीं, जुनून नहीं
आंखों का नूर भी नहीं
तेरा साथ और हाथों में हाथ नहीं
दुनिया की वो मंजिलें भी नहीं
जिंदगी है मगर तेरे नाम की नहीं
सांसें भी है मगर वो एहसास नहीं
खालीपन है कुछ यहां
धड़कता सा है पर दिल नहीं

"तीसरा पहलू"
खैर यूं एक दिन
चाहत भी मेरे हिसाब की होगी,
बातें भी बस मेरे नाम की होगी
दिल में जो थोड़ी है जुरअतें,
उनसे अपनी पहचान बना
बिखरूंगी, सवरूंगी, उरूंगी भी
अरमानों ने जो मिटा दी धुंध की चादरें
आंखों से आंखों को बात करने दूंगी
रंग आसमानी सजेगा चेहरे पे
उन रंगों से भरेगा मेरा दामन भी
जिंदगी भी होगी, साथ भी होगा
मंजिल भी होगी वो एहसास भी होगा
दिल भी होगा जान भी होगी
कायनात की वो अधूरी रात भी होगी
जब चाहत भी मेरी होगी और
इश्क़ के पन्ने पर नाम भी मेरा होगा


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