Skip to main content

दो दिल एक कहानी

मुझमें और तुममें काबिलियत है
एक बहुत ख़ास दोस्त बनने की
एक ऐसा दोस्त जो सिर्फ
अपने नाम से नहीं, बल्कि
एक दूसरे के नाम से पहचाने जाते है
एक ऐसा दोस्त जो जिंदगी के
हर धूप छांव में साथ खड़े रहते है
हर तूफ़ान में भी चट्टान से डटे रहते है
एक ऐसा हमकदम जो
एकांत की उदासिओं को
दोस्ती की चमक से रोशन कर देते है
एक ऐसा साथी जो खुद भी ऊंचा उठता है
और दूसरे का नाम भी
फलक के दायरों में लिखता है।

हां हममें काबिलियत है
एक अदद दोस्त बनने की
पर ये काबिलियत यूं ही नहीं है
ये शायद तुम भी जानते हो।
हमारे नाम अलग है पर सोच वही है
बातें अलग है पर किस्से वही है
हमारे जिस्म अलग है
पर उनमें बसी रूह की तासीर वही है
हमारी मंजिलें अलग है
पर रास्ता वही कारवां भी वही है
दिलों कि धड़कने अलग है
पर उनके दायरों में बिखरी यादें वही है
हम ख्वाबिदा नहीं है,
पर ख्वाब एक से देखते है।
राजदां भी नहीं है,
मगर राज़ एक से रखते है।

हममें काबिलियत है
एक दूसरे को ऊंचा उठाने की
अपनी मंजिलों को पास लाने की
क्यूंकि हमारे बीच
दिल, रूह और हस्ती को तोड़ने वाली
इश्क़ की दीवार नहीं है
हमारे बीच इकरार नहीं है
कोई इज़हार भी नहीं है।
कुछ है तो बस दीवारों पर
दोस्ती की दरीचें है
जिनके किनारे मैं और तुम
अपनी अपनी बेताबियां लिए बैठे है
तुम्हें मंजिले अपनी बनानी  है
मुझे राह अपनी पकड़नी है
तुम्हारी जिन्दगी के अपने दायरे है
मेरे वक़्त के अपने घरौंदे है
तुम्हारे दिलों के अपने जज़्बात है
मेरे नशेमन में अपनी तस्वीरें है।
बात अलग अलग सी लगती है
पर इनके मायने एक से है
अल्फ़ाज़ बेशक अलग है
मगर पहचान एक से है।

तुम आगे बढ़ते जाओगे राह में
मैं भी ऊपर उठता जाऊंगा
जो कभी तुम झुकोगे
तो मैं भी नीचे आऊंगा
तुम गिरोगे तो मै
फूलों की क्यारियां बन जाऊंगा।
अंधेरे पलों में मैं
जुगनुओं की तरह रास्ते चमकाऊंगा
तुम राह मुझे दिखाना
मैं कदम साथ बढ़ाऊंगा
बेअदबी से यूहीं आगे बढ़ते जाएंगे
और अपनी दोस्ती के घरौंदे को
रोज़ नए रंगों से सजाते जाएंगे
हमदम नहीं हमकदम बनकर
वादे हम अपने निभाएंगे।
अपने बीच कभी तकरारें नहीं आएंगी
शक़, गुस्ताख़ी, परदादारी की
गुंजाइशें नहीं आएंगी
आएंगी तो बस नुमाइशें
अपने हौसलों कि और
चेहरे पे चमकते मुस्कानों की।

हां कुछ तो है अकीदें ऐसे
इरादे नेक और दिल पाक है अपने।
सबमें तो नहीं होती इतनी हस्सासें
ना कुरबतें, ना ऐसी बातें
पर तुममें और मुझमें है कुछ बात
जो दिलों के दो दायरे बनाते हुए भी
ख्याल एक सा रखते है
नाम अलग है पर
पहचान एक सा रखते है
लफ़्ज़ मुख्तलिफ है मगर
लम्हों की स्याही से
दास्तां एक सा रखते है
रिश्तों के मायने अलग है
पर दोस्ती की किताबों में
कहानियों का गुलिस्तां एक सा रखते है।


©
Like our page on Facebook

Comments

Popular posts from this blog

परिकल्पना - सफ़र जिंदगी का

हम एक जीवन की कल्पना करते है फिर उस परिकल्पना में रंग भरते है कुछ छोटी कुछ बड़ी आशाएं, कुछ यादें, कुछ बातें, लम्हों कि सौगातें कुछ आकांक्षायें पहलू में समेट लेते है कुछ बस एक काश में ही सिमट जाते है कुछ जिरह, कुछ विरह, कुछ जद्दोजेहद सब मिल कर स्याह बनकर कोरे पन्नों पर कुछ लिखना चाहते है, किरदार सजते है, कुछ किस्से संवरते है कुछ दाग बनकर वहीं रह जाते है। हम खुशियां समेटते है सन्नाटे छाटते है चलते है, भागते है, हांफते है, थक कर दहलीज पर बैठ जाते है सांस लेने की कवायद करते है, लड़ते है एक उम्मीद लिए आसमां में तैरते है एक तिनका पकड़ते है चांद पर बैठ जाते है कभी बादलों से उलझकर गिर जाते है और सागर की गहराइयों में खो जाते है उस शून्य में रंग सारे सफेद हो जाते है पीछे बचती है एक लकीर काले स्याह रंग की, अंधकार समेटे जो जमीं को आसमां से जोड़ती है यादों की बारिश उस लकीर को सिंचती है कुछ टहनियों को जन्म देती है जो एक आखरी सफर को छाव देते है हम चलते जाते है, अकेले उस सफर पर और कल्पनाएं, जिनमें कुछ रंग भरे थे फूल बनकर बिखरते जाते है कांटे जो पावों में छुपे थे, चुभे थे ...

प्रिय पाठकों के नाम एक पत्र।

प्रिय पाठकगण, हमारा सप्रेम नमस्कार। आशा करते है आप सब सकुशल और मंगल होंगे और अपनी अपनी जिंदगीओं के धूप छांव तथा हर प्रकार के लम्हों को सराहनीय तरीके से व्यतीत कर रहे होंगे। यूं तो आजकल पत्रों का चलन नहीं रहा पर एक वक़्त था जब ये पत्र चिट्ठी ख़त और जाने किन किन नामों से बुलाए जाने वाले कागज़ के टुकड़े हमारे एहसासों, सवालातों, ख्यालातों, जज़्बातों और दिल में छुपी अनकही अनसुनी बातों को एक अल्फ़ाज़ देते थे, इन्हें एक आवाज़ देते थे एक जरिया थे इनको अपने मुकाम तक पहुंचाने का। हम भी इन्हीं उम्मीदों के साथ एक पत्र आप सबके नाम साझा कर रहे है। एक कोशिश कर रहे है अपनी खामोशियों को एक आवाज़ की शक्ल देकर आप तक पहुंचाने की। खामोशियों की भी अपनी अलग दुनिया है अपनी अलग विडंबना है। खामोशियां वो शब्द है जो दिल के दायरों में छुपे होते है, इनकी अपनी आवाज़ नहीं होती। इन खामोशियों को आवाज़ हमारे अल्फ़ाज़ देते है, इन्हें अपनी पहचान देते है। वो अल्फ़ाज़ जो जुबां पे तो नहीं आ पाते लेकिन दिल की कलम से पन्नों पर कैद हो जाते है। हमारे एहसास, जज़्बात और जिंदगी के छोटे बड़े, हस्ते रोते लम्हें इनमें रंग भरते ह...

आशा और अवधारणा के बीच का मन

 आंखें मूंद कर जब बैठते है कुछ लकीरें सी तैरने लगती है कभी ऊपर कभी नीचे  कभी लहरों सी नाचने लगती है कभी टिमटिमाती है, कभी शांत हो जाती है। हाथ की लकीरों की तरह नहीं है ये निष्ठुर, निर्मम, धारा सी स्थिर हर पल स्तब्ध करने वाली। चंचल होती है ये लकीरें, बिल्कुल मन की तरह। मन, जो ग्रसित होता है अवधारणाओं से, जो बंधा होता है आशाओं से। ये उन्हीं अवधारणाओं और आशाओं के बीच कि लकीरें है, जो उन्हें बांधे तो रखती है मगर करीब नहीं आने देती और इसी दायरे के बीच ये लकीरें  नाचती, मचलती, इठलाती है। ये दायरे कभी अथाह सागर जितने  तो कभी सांस और प्राण जितने होते है। मन भी इन्हीं दायरों के बीच भटकता है, जिंदगी ढूंढता है गम की छांव में सिमट जाता है खुशियों का आंचल लिए दौड़ता है थक कर उम्मीदों का आशियां बना सो जाता है। सपनों का पंख बनाता है, उड़ना चाहता है पर दायरों की जंजीर इसे बांधे रखती है। मन फिर लकीरों को पकड़ता है आजाद होना चाहता है उनके सहारे ऊपर नीचे  लहरों सा नाचता है। जब सब शांत हो जाता है, तो एक रौशनी सी नजर आती है, वो किरण पकड़ लेता है, अब मन आजाद है शांत, बिना किसी शोर के...